पहले सपने दिखाओ फिर पार्टी बनाओ !


बाबा रामदेव की रामलीला हर साल होती है ! जरुर देखिये हर साल रामलीला मैदान , नई दिल्ली ! पिछली बार बाबा का नारी रूप दिखा था इस बार … बाबा की रामलीला जारी है…
निर्मल बाबा का अजीब ज्ञान बाँटा जता है हर रोज निर्मल दरबार में ! और बाबू नहीं जा सकते तो टीवी पे सुनिए !
नित्यानंद बाबा – अब क्या कहें सब कुछ जग जाहिर है ! रासलीला !
इस युग का नाम बाबा-युग  रख देना चाहिए ! कलियुग कही खो सा गया है और बाबा, अन्ना और स्वामी लोगो का ख्याति छा रही है !
आज चेन्नई खूब जम के बारिश हुई क्युकि रामलीला में बाबा दुखी थे , अस्वस्थ थे  क्युकि इस बार लोगो के साथ साथ दान दक्षिणा भी थोडा कम ही आया है लगता है !
लगभग ११०० करोड़ कि सालाना कमाई वाले संस्थाओ के सर्वे सर्व बाबा को योग के साथ लीला करने में बड़ा आनंद आता है! काला धन वापस लाओ , मन करे तो लोकपाल भी ला दो !
बाबा रामदेव कि मुलायम से बड़ी बनती है और बने भी क्यों न दोनों ने यात्रा साईकिल से जो शुरू कि और आज कहाँ! कब साईकिल कहाँ छूट गयी किसी को नहीं पाता !
अब तो आलस इतना कि मुलायम के बेटे यमुना एक्सप्रेस वे का उद्घाटन भी विडियो कोंफेरेंसिंग से करते हैं ! अच्छा ही है कुछ पैसे तो बचे UP के विकास के लिए !
अन्ना का जंतर मंतर का चक्कर जैसे ही ख़त्म हुआ बाबा की बडबोली शुरू हो गयी , बहुत अच्छा टीम को-आर्डिनेसन है !
बस जनता को सपने दिखाने का चक्र जारी रखना है ! बहुत खूब ! कभी राम के नाम पे तो कभी रामलीला मैदान से! हमारे सपने वही हैं , हम वही हैं बस हर बार सपना दिखाने वाला बदल जाता है ! कभी हिदुत्व का चेहरा वाजपेयी , तो कभी विकास और समाजवादी चेहरे और अब भ्रष्टाचार और काला-सफ़ेद धन का महाचक्र !
पहले सपने दिखाओ फिर पार्टी बनाओ … रामनाम पे राज करके गए अब राष्ट्रवाद पे राज करने वाले आ रहे हैं !
सपने देखता आम भारतीय हर बार छला ही जता है !

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2 thoughts on “पहले सपने दिखाओ फिर पार्टी बनाओ !

  1. उपेन्द्र दुबे कहते हैं:

    वैसे एक बात बताइए सपने देखने वाला भारतीय छाला जाता है …ए तो ठीक है ..पर आज कल ए सोसल मीडिया ब्लॉग पर नए नए उभरते आलोचक …जिनका काम हर बाल की खाल निकालना है…२ -४ धमाकेदार चिट्ठे ब्लॉग पे डाल देना और कहना की भाई सब चोर हैं …और खुद घर पर आराम से बैठना …इस जमात के लोग ठेकेदार हो गए हैं क्या ???

    न हिंग लगे न फिटकिरी …बाकी की बस किरकिरी ..अच्छा धंधा है भाईसाहब घर में बैठ के पगुराने का |
    .बाजपेयी उस जमात को राष्ट्रवादी नज़र आते हैं …बुखारी और मनमोहन सिंह सेकुलर …और रामदेव और अन्ना मदारी तो…बन्दर जनता प्यारी…स्वयम्भू बुध्हिजिवियों के टोली खली पींगें बघारने में व्यस्त है …मुझे लगता है ..भारत उनसे ही सबसे ज्यादा त्रस्त है|

    –सादर,
    उपेन्द्र दुबे
    http://uljheshabd.wordpress.com/

    • Suniel Gupta कहते हैं:

      उपेन्द्र जी ! मै आपकी बात से बिलकुल सहमत हूँ कि सिर्फ बातें करने से कुछ नहीं होता परन्तु इसका मतलब यह नहीं कि अभिव्यक्ति और आलोचना न कि जाये ! ये सिर्फ मेरे विचार मात्र हैं !

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