हठधर्मिता या फिर लापरवाह राजनीति


भाजपा का न कोई उद्देश्य बचा है और न ही कोई मुद्दा और इस पार्टी की सबसे बड़ी परेशानी की आधे से ज्यादे तो प्रधानमंत्री बनना का सपना लिए बैठे हैं ! और कुछ तो अवकाश लेने की उम्र में पुराने सपने लिए जैसे तैसे बस राजनीतिक जीवन जे रहे हैं !
इन्तेहाँ हो गयी इंतज़ार कि ,  आई न बारी कुर्सी कब्जियाने की !
उम्र बीती जाये अब इंतज़ार में ,  जाने कितने बसंत गए इस आस में !
अब न होता सब्र , करो संसद भंग ताकि आए चुनाव जल्द
और करें कुर्सी-लीला पांच साल तक !

बी जे पी कि हठधर्मिता या फिर लापरवाह राजनीति या फिर सच कहें तो ऐसा लग रहा है कि असमंजसता में निर्णय न ले पाने कि कमजोरी ! जो भी है देश कि पैसे का सरासर दुरुपयोग किया जा रहा है ! भाजपा न्यूज़ चैनलों पर तो खूब बहस कर रही है ! भाजपा के नेता हर चैनल पे अपनी वाक्युद्ध कुशलता दिखाते हुए दिख रहे हैं पर संसद में बहस नहीं करेंगे हमारे विपक्ष के नेता ! जैसे जनता ने उन्हें संसद के बाहर टीवी चंनेलो पे बोलने के लिए चुना हो !
१० दिन हो गए लेकिन जाने किस गुरुर में हाथ कर बैठी है ये राष्ट्रिय पार्टी !
विपक्ष धर्म सिर्फ विरोध नहीं बल्कि सही मुद्दों को संसद में उठाना और सरकार से जवाब तलब करना होता न कि संसद को बर्खाश्त कर राजनीतिक लाभ उठाने कि कोशिश करना !
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