प्रेम का वास्तविकता से सामना


प्यार अगर समझना मुश्किल है तो निभाना उससे भी मुश्किल !

प्यार के २ पहलू पहलू – प्यार जब सिर्फ प्रेमी प्रेमिका के बीच हो और बाकी कुछ न हो सिर्फ दो दिल और उनकी बातें , उनके सपने … मतलब सबकुछ एकदम पूर्ण जैसा … संभवतः सपने में ही संभव और जब दो दिलों के बीच प्यार पनप रहा हो तो वो हकीक़त से थोड़े दूर स्वप्न तल पर ही संजोये जाते हैं ! शुरुआत ही कुछ ऐसे होती है कि तुम मेरे सपने में आती हो, तुम्हे पहले कही देखा है, जरुर किसी जन्म का रिश्ता है ..वगैरह वगैरह …

दूसरा पहलू उतना ही जटिल , जीवन के वास्तविक धरातल पर … जब घर परिवार दोस्त रिश्तेदार सबके साथ उस प्यार को संजोना होता है … प्यार उस प्रेम संसार से उतर कर जीवन के असली रूप को देखता है जहाँ और भी तमाम रिश्ते और बहुत सारी चीजे लेके चलना होता है… प्यार थोड़ा सहम सा जाता है ! अचानक से ये क्या हो गया !! दो दिल ढाई अक्षर – प्रेम का वास्तविकता से सामना … थोड़ी दिक्कत होनी लाज़मी है … पर हाँ प्यार की परीक्षा भी तो जरुरी है …

पहले जहाँ प्रेम कसमो वादों और सपनो में जीता था अब उसे उन कसमो वादों और सपनो को हकीक़त में पूरा करना और जीना है ! पहले जहाँ प्रेम के पास कुछ घंटे होते थे तो अब पूरे २४ के २४ घंटे !
बस इन दो पहलुओं के बीच उलझा प्रेम कई बार संभल जाता है और कई बार लड़खड़ा जाता है ! कइयो को पूरा जीवन वैसे ही प्यार में जीते देखा है तो कईयों को टूटते बिखरते हुए भी देखा है !

बात बस इतनी सी है– बदलते परिस्थितियों के साथ खुद को ढालना और रिश्तो की हर डोर को प्यार और संयम से बांधे रखना !

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