जय माँ दुर्गा !

उन्मुक्त विचारो का प्रवाह
भावो का बहता अश्रु विशाल
माँ की महिमा देखि हमने
माँ का देखा प्यार
नौ दिन नवरातो में
देखा माँ के रूप अनेक
देखा पाया माँ का प्यार
अब दिन आया है दसवां
विदा होने वाली हैं माँ दुर्गा
मन और ह्रदय नम है
किन्तु विदाई तो होनी ही है
सत झूठ भेद बता
विजय सत्य की ही होनी है
सीखा जीवन का राग
महिषासुरमर्दिनी जाने वाली हैं उस लोक
श्रध्दा भाव भरे नम ह्रदय से
विदा माँ को करेंगे
और रहेगा अगले साल का इंतज़ार
जय माँ दुर्गा ! जय माँ दुर्गा !