मेरी कहानी

देवरिया, उत्तर प्रदेश का निवासी पहले तकनिकी पढाई करने और फिर जीविका अर्जन के महाजाल में फंस कर चेन्नई, तमिलनाडु का निवासी बन कर रह गया हूँ | ६ साल निकल गए पर तमिल न सीख पाने की खीझ और हिंदी में न बतिया पाने का दुःख हमेशा रहता है | वैसे तो हिंदी भाषी मित्रो के साथ खूब बातें हो जाती हैं पर अपने यहाँ जैसी बात नहीं आ पाती बस एक कसक सी रह ही जाती है कि काश ये ऑटो और सब्जी वाला हिंदी में आलू- दाल का भाव बता देता पर चेन्नई में असंभव जैसा ही है |
जीने के लिए एक तकनिकी कंपनी में काम और फिर हिंदी सुनने के लिए टीवी का साथ , बस कट रहा है जीवन …
बचपन से ही साहित्य से काफी लगाव रहा और इसी लगाव ने हिंदी में कुछ कवितायेँ और लेख लिखने लगा | लेकिन चेन्नई आने के बाद हिंदी साहित्य से जुडाव थोडा कम हुआ पर ख़त्म नहीं |
हरिवंश राय बच्चन जी का बहुत बड़ा प्रशंसक हूँ और मधुशाला कि पंक्तियाँ मेरी पसंदीदा |
लिखना पढना और न्यूज़ चैनल सुनना काफी पसंद है |
कवितायेँ लिखना संझिप्त और पूर्ण अभिव्यक्ति का सबसे उत्तम साधन मानता हूँ |
हिंदी साहित्य में कुछ योगदान मेरा भी हो ये  मेरे जीवन का एक मकसद है |

Advertisements

One thought on “मेरी कहानी

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s