जाति प्रथा -एक अभिशाप

जाति प्रथा हमारे समाज को सही तरह से चलने के लिए शुरू किया गया था न की उसे टुकडो में बाँट कर आपस में घृणा बाटने के लिए|  वर्ण प्रथा की शुरुआत समाज में कार्य को विभाजित कर उसे सही रूप से कार्यान्वित करने के लिए किया गया था न की उच-नीच जैसी कुप्रथा को प्रेरित कर समाज को ऐसा बना देना जहा कर्म,ज्ञान और कर्मठता कम और जाति को ज्यादे महत्ता दी जाती है |
भारतीय समाज की एक बड़ी समस्या उसकी अपनी बनायीं जाति प्रथा है! मैं ये नहीं कहता की जाति प्रथा एक बुराई है पर इस जाति के मोहपाश में बधे हमारे समाज ने अनेको बार अनगिनत लोगो का जीवन एक अभिशापित कर के उनकी खुशियों, उनके सपने और उनके भविष्य को ऐसा अन्धकार में झोंक दिया की कइयो ने आत्महत्या को उस अभिशापित जीवन से मुक्ति का साधन समझा तो बाकियों ने उसे अपना भाग्यगाथा समझ कर उसी में घूँट घूँट कर जीवनयापित करने को सही समझा| जाति प्रथा सबसे बड़े शिकार प्रेम करने वाले युवा होते हैं जिन्हें पहले तो घर परिवार और समाज का वास्ता देकर उनके प्रेम से वंचित करने की घृणित कृत्य किया जाता है और यदि फिर भी दो प्रेमी साहस करके विरोध करके इस प्रथा के विरुद्ध जा कर अपना जीवन जीने की कोशिश करते हैं तो उन्हें या तो समाज से बहिस्कृत कर दिया जाता है या फिर उन्हें सबके सामने जलील कर के उनके जीवन की बलि ले ली जाति है| हमारी इस घटिया मानसिकता ने आजतक न जाने कितने प्रेमियों की बलि लेकर अपने इस परंपरा पर गर्व कर रहा है|
जाति प्रथा मानवता के कितने हिस्से कर सकती है इसका सर्वोत्तम उदहारण भारतीय वर्ण प्रथा है| धर्म में भी जाति और जाति में भी गोत्र|

अन्न जहाँ का हमने खाया , नीर जहाँ का हमने पिया

१५ अगस्त- स्वतंत्रता दिवस ! आज़ादी का उत्सव ! गर्व का दिन और शहीदों को श्रद्धांजलि देने का पर्व !
इन सब के बीच आज बचपन बहुत याद आ जता है ! सुबह एक कविता लिखा जिस पर मेरे मित्र पाण्डेय जी का कमेन्ट आया कि कैसे स्कूल में नारे लगाये जाते थे ! भारत माता की जय ! १५ अगस्त अमर रहे ! अन्न जहाँ का हमने खाया , नीर जहाँ का हमने पिया ….. इसकी रक्षा कौन करेगा ? इस पर एक सुर में हम सब बड़े ही गर्व और उत्साह से कहते… हम करेंगे हम करेंगे हम करेंगे !
कमाल का दिन हुआ करता था ! सुबह सुबह उठ कर तैयार हो और फिर हाथ में झंडा लिए निकल पड़ो स्कूल के लिए ! एक अद्भुत त्यौहार जिसमे किसी जाती धर्म का भेद नहीं ! सबमे एक ही उत्साह एक ही तरह का देशभक्ति !
चारो तरफ से भारत माता की जय हो के नारे गूंजते ! सुबह सुबह प्रभातफेरी निकाली जाती जिसमे पूरा स्कूल जाता ! बचपन में १५ अगस्त का इंतजार लड्डू और जलेबी के लिए भी रहता था क्युकि आज के दिन खूब चलता था जलेबी और लड्डू !
सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते और सब कुछ न कुछ करते .. कोई देशभक्ति गीत गाता, कोई नाटक में भाग लेता तो कोई भाषण देता… सबका उद्देश्य सिर्फ एक वीर शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों को याद कर उनका आभार मानना !
सबसे ज्यादे याद आते हैं ओमप्रकाश सर जो मंच पे खड़े होकर कई घंटो तक नारों की उद्घोषणा करते रहते ! हिंदी,  संस्कृत और अंग्रेजी के विद्वान ओमप्रकाश सर की आवाज़ आज भी ताज़ा है जेहन में !
लाइन लगाकर लड्डू लेने के बाद , इस स्वंतंत्रता दिवस के प्रसाद को घर पे जाकर सबको देता ! देवरिया का पुलिस लाइन में होने वाला समारोह सबसे भव्य हुआ करता था !
पूरा शहर जैसे जश्न में डूबा , बच्चे झंडे को लहराते रहते पूरे दिन ! सबसे पहला झंडा ठीक ७ बजे सामने नेहरु विद्यालय में फेहराया जाता और हम सब उसे नमन करते !
आज यहाँ चेन्नई में बैठे बैठे वो सारे क्षण जैसे  जीवित हो आए … और रूम में ही नारे लगा लिया .. भारत माता की जय , महात्मा गाँधी अमर रहे !

रामलीला समाप्त हुई !

बाबा रामदेव कि लीला अजब ! यहाँ चेन्नई में बैठे पाता नहीं चलता बाबा कि आन्दोलन शक्ति … कभी कभी लगता है काश! दिल्ली में होते तो बाबा के असमंजस को करीब से समझ पाते | कभी काला धन , कभी कांग्रेस, कभी भ्रष्टाचार, कभी अन्ना के साथ तो कभी अन्ना से काफी दूर !
बाबा ने कहा कि २०१४ तक बताएँगे कि कौन सी पार्टी के साथ हैं ! सुना है बाबा को मुलायम मायावती जैसे नेताओ का साथ मिल रहा है ! बहुत खूब बाबा जी ! बढ़िया हैं !
नया नारा भी दिया ने आज – कांग्रेस हटाओ देश बचाओ ! कुछ दिनों पहले तक बाबा ने मुद्दों पे आधारित आन्दोलन करने कि बात लगता है भावावेश में कह गए थे !
शायद केजरीवाल से काफी कुछ सीख गए रामदेव ! अब तो मनमोहन सिंह  की खैर नहीं !
बाबा काला धन लाना चाहते हैं या कांग्रेस हटाना ! मुश्किल है ! बाबा भी जानते शायद !
वैसे बाबा “अन्ना पार्टी ” को समर्थन क्यों नहीं देना चाहते ! आश्चर्य है !
राहुल ने कहा बाबा से गंभीर मुद्दे हैं उनके पास ! जी हाँ चुनाव जो आ रहे हैं ! मुद्दे तो बनाने ही पड़ेंगे !
बस देखिये गंगा स्नान के बाद रामदेव कौन सा आसन करते हैं … पल्टासन या बड्बोलासन … वैसे बाबा के पास वोट बैंक तो काफी है !
देखिये भारतीय राजनीती कि ये लीला क्या दे पाती है !
स्वतंत्रता दिवस कि पूर्व संध्या पर देश की समृद्धि , विकास और गौरव कि कामना करता हूँ !

पहले सपने दिखाओ फिर पार्टी बनाओ !

बाबा रामदेव की रामलीला हर साल होती है ! जरुर देखिये हर साल रामलीला मैदान , नई दिल्ली ! पिछली बार बाबा का नारी रूप दिखा था इस बार … बाबा की रामलीला जारी है…
निर्मल बाबा का अजीब ज्ञान बाँटा जता है हर रोज निर्मल दरबार में ! और बाबू नहीं जा सकते तो टीवी पे सुनिए !
नित्यानंद बाबा – अब क्या कहें सब कुछ जग जाहिर है ! रासलीला !
इस युग का नाम बाबा-युग  रख देना चाहिए ! कलियुग कही खो सा गया है और बाबा, अन्ना और स्वामी लोगो का ख्याति छा रही है !
आज चेन्नई खूब जम के बारिश हुई क्युकि रामलीला में बाबा दुखी थे , अस्वस्थ थे  क्युकि इस बार लोगो के साथ साथ दान दक्षिणा भी थोडा कम ही आया है लगता है !
लगभग ११०० करोड़ कि सालाना कमाई वाले संस्थाओ के सर्वे सर्व बाबा को योग के साथ लीला करने में बड़ा आनंद आता है! काला धन वापस लाओ , मन करे तो लोकपाल भी ला दो !
बाबा रामदेव कि मुलायम से बड़ी बनती है और बने भी क्यों न दोनों ने यात्रा साईकिल से जो शुरू कि और आज कहाँ! कब साईकिल कहाँ छूट गयी किसी को नहीं पाता !
अब तो आलस इतना कि मुलायम के बेटे यमुना एक्सप्रेस वे का उद्घाटन भी विडियो कोंफेरेंसिंग से करते हैं ! अच्छा ही है कुछ पैसे तो बचे UP के विकास के लिए !
अन्ना का जंतर मंतर का चक्कर जैसे ही ख़त्म हुआ बाबा की बडबोली शुरू हो गयी , बहुत अच्छा टीम को-आर्डिनेसन है !
बस जनता को सपने दिखाने का चक्र जारी रखना है ! बहुत खूब ! कभी राम के नाम पे तो कभी रामलीला मैदान से! हमारे सपने वही हैं , हम वही हैं बस हर बार सपना दिखाने वाला बदल जाता है ! कभी हिदुत्व का चेहरा वाजपेयी , तो कभी विकास और समाजवादी चेहरे और अब भ्रष्टाचार और काला-सफ़ेद धन का महाचक्र !
पहले सपने दिखाओ फिर पार्टी बनाओ … रामनाम पे राज करके गए अब राष्ट्रवाद पे राज करने वाले आ रहे हैं !
सपने देखता आम भारतीय हर बार छला ही जता है !

अप्रेजल बम – मूल्यांकन प्रतिभा का

पदोन्नति- यानि कि ख़ुशी, मतलब एक ऐसा क्षण जब आप अपनी पीठ थपथपा के खुद की थोड़ी सराहना थोड़ी तारीफ और मन करे तो अपने पे थोड़ा गर्व भी महसूस कर सकते हो या फिर करते ही हैं | एक ऐसा पल जब पल आप अपने को थोड़ा पीछे मुड के देखते हो और फिर कहते हो हाँ कुछ तो किया है की आज ये सराहना और बधाइयाँ मिल रही हैं और फिर थोड़ा सा लक्ष्य के पास जाते हुए महसूस करते हो |
कुलमिलाकर ख़ुशी और गर्व का एक ऐसा पल जो आत्मविश्वास और कुछ और अच्छा करने की प्रेरणा भी देता है |
आज ऑफिस में अचानक से धीरे धीरे खुसफुसाहट की आवाजें सुनाई देने पर जब मैंने अपने आजू बाजू देखा तो मुझे लग गया की बस भैया आज तो अप्रेजल बम फूट गया लगता है | जी हाँ अप्रेजल एक बम जैसा ही हैं जो फूटता है तो ख़ुशी और गम दोनों देता है | अब आप कहोगे की बम और ख़ुशी !! हाँ भाई ! जैसे बम फोड़ने वाले को ख़ुशी और जिसपे फूटे उसे कष्ट होता है ! ठीक उसी तरह अप्रेजल बम कुछ को ख़ुशी बहुतो को गम गम दे जाता है !
अप्रेजल बम मुख्यतः ४ प्रकार के पाए गए हैं :
१) अप्रतिम बम
२) असाधारण बम
३) साधारण बम
४) अति-साधारण बम
अप्रतिम बम – जिसपे गिरता है उसे अपार ख़ुशी और गर्वान्वित क्षण देता है परन्तु जिसपे नहीं गिरता उसे अतिकष्ट और ग्लानी देता है | अप्रतिम बम गिरने पे पदोन्नति के कीट सबसे ज्यादे पनपते है |

असाधारण बम – असाधारण बम जिस पे गिरता है उसे असाधारण तो नहीं परन्तु दुःख सुख की परिभाषा से परे ले जाता है | मतलब की न ख़ुशी न गम और जब दो असाधारण बम वाले आपस में मिलते हैं तो कहते हैं की न अप्रतिम हम न अप्रतिम तुम ! साधारण बम समाज के समता के अधिकार को सबसे ज्यादे बढ़ावा देता है और इससे कंपनी में सद्भावना और भाईचारे में बढ़ोत्तरी होती है |
साधारण बम – जिसपे गिरे वो भी चुप चाप रहता है और उसके आसपास वाले भी | इसकी तीव्रता अप्रतिम से थोड़ी ज्यादे किन्तु ख़ुशी किसी को नहीं देता |
अति-साधारण बम –  इसकी कामना कोई भी नहीं करता न गिराने वाला और न ही जिसपे गिरता है ! अतितीव्र क्षमता का यह अति-साधारण बम सबसे नाशक अस्त्र है जिसका शत्रु सुखमय भविष्य है !
खैर ये तो चलता ही रहता है पर हाँ एक बात तो है जिस देश में बम का इतना दहशत है वही लाखों मजदूर अप्रेजल बमों के गिरने कि आस में पूरे साल मजदूरी करते हैं !
चलिए तय समय पर साल में एक बार गिरने वाले इस बम का इंतज़ार एक बार फिर से  शुरू हो चुका !

मेरे दोस्त मेरी यादें !

जो तेरा है वो मेरा है ! एयरटेल का ये नया गाना मुझे काफी अच्छा लगा ! और इस गाने की एक लाइन से आज शुरुआत करूँगा — ब्लॉग मेरा तेरा चर्चा हो  !
आज फ्रेंडशिप डे के दिन दालान ब्लॉग पर रंजन ऋतुराज का लिखा हुआ ब्लॉग मेरे दोस्त पढ़ा और पढ़ के काफी पुरानी स्मृतियों में भाव विभोर होकर रह गया |
काफी कुछ याद आया काफी दोस्त याद आए और इन सब के बीच बहुत सारी बातें याद आई कुछ अच्छी कुछ खट्टी और सबसे ज्यादे जो याद आया वो मेरा अपना शहर देवरिया (उत्तर प्रदेश ) और वो मेरा बचपन |
दोस्ती कि बातें याद आई तो सबसे पहले याद आए दिग्विजय मिश्रा, देवरिया न्यू कालोनी में बाबा राघव दास इंटर कॉलेज के सामने किराये के मकान में रहता था दिग्विजय का परिवार | कुछ दिनों बाद उसका परिवार देवरिया छोड़ के कही और चले गए | मैं कई बार उस घर के सामने जाकर ये सोचता कि दिग्गी मुझसे मिलने आएगा, बचपन का मन था बस उम्मीदों में जीता था | लेकिन आज भी जब कभी उस तरफ जाना होता है तो उस मकान को देख दिग्गी कि याद आ ही जाती है | काफी दिनों से मिलना नहीं हुआ, हाँ इतना जरुर पता है कि दिल्ली में है और दिल्ली एअरपोर्ट पे Continuing Airworthiness मेनेजर है | कुछ सालो पहले चेन्नई आया था तो थोड़ी देर के लिए मिला था काफी सालो बाद बहुत अच्छा लगा था | आज जिंदगी के भागम भाग में वक़्त जाने कब गुजर गया पता नहीं चला और कई सालों से बात तक न हो पाई है  लेकिन आज भी दोस्त तुम बहुत याद आते हो !
शलेन्द्र सिंह , सतीश पाण्डेय और प्रवीण त्रिपाठी मेरे ३ ऐसे दोस्त जो भी मेरे साथ है और बातें होती रहती हैं | शैलेन्द्र और प्रवीण ने शादी कर ली लेकिन हम लोग शादी में शामिल न हो पाए फिर वही कहानी जिंदगी कि भागम भाग | हाल ही में सतीश जो कि मुंबई में सॉफ्टवेर इंजिनियर हैं के साथ कुछ समय रहने का मौका मिला जब मेरा मुंबई जाना हुआ था एक महीने के लिए | सतीश से मिलके ऐसा लगा कि जैसे हाँ इसे ही दोस्ती कहते हैं लगा ही नहीं कि अब ये वो  बचपन नहीं वो शहर नहीं | हमारी दोस्ती में वही बचपना वही प्यार आज भी है और सदा रहेगा | सतीश, प्रवीण, शैलेन्द्र और मैं ८वीं  तक एक ही स्कूल(सिटी मांटेसरी हाई स्कूल ) में पढ़े फिर सतीश और प्रवीण प्रेस्टीज स्कूल चले गए १०वी के लिए | लेकिन हम तीनो का मिलना कम न हुआ | रोज शाम को ४ बजे दोनों  मेरे घर पे होते और वही घर कि दहलीज पे खड़े खड़े हम घंटो बातें करते रहते थे |
आज मेरे ये ४ दोस्त ४ अलग अलग शहरों में रह रहे हैं – सतीश – मुंबई , शलेन्द्र – बंगलौर , दिग्विजय – दिल्ली और प्रवीण – क्या बताएं खाना बदोश जीवन जीता है बंदा ! लेकिन आज भी वो पल, वो दोस्ती कि खट्टी मीठी यादें याद कर बस यही कहने का मन करता है कि जो तेरा है वो मेरा है … हाँ वो पल हम सब के थे और हमारे जेहन में हमेशा रहेंगे |
जीवन आगे बढ़ा और कुछ और नए दोस्त बने और बहुत सारे बने और सबको आज के दिन की शुभकामनाएं |

जय हिंदी ! जय हिंदुस्तान !

जी हाँ ! हिंदी भी बोलती है और बहुत कुछ बोलना और बतियाना चाहती है| अपनी भाषा- हिंदी भी बोलती है ! एक ऐसा ही प्रयास है हिंदी कि खोई हुई लेखन प्रतिष्ठा को पुनः संजोने और गरिमामय बनाने कि दिशा में |
आज जब हम सब एक नए युग में प्रवेश कर चुके हैं जहाँ विज्ञान और विकास कि राह में हिंदी कहीं पीछे छूटती जा रही है | आज हिंदी बस एक हिंदुस्तान में बोली जाने वाली एक ऐसी भाषा बन कर रह गयी है जिसका इस्तेमाल न्यूज़ चैनल या फिर हिंदी सिनेमा में बखूबी किया जा रहा है लेकिन जब बात हिंदी साहित्य, हिंदी लेखन और हिंदी में अभिव्यक्ति की आती है तब हिंदी पढ़ा जाना लिखा जाना और बोला जाना अविकसित समाज की निसानी मानी जाने लगती है | हमारे अभिनेता, गायक, गीतकार, कहानीकार और संवाद लेखक आदि  जो हिंदी भाषा कि बदौलत ख्याति और धन अर्जित कर पाए वो भी टीवी या फिर किसी समारोह में हिंदी बोलने से परहेज करते पाए जाते हैं |
मैंने कई अन्य भारतीय भाषाओँ के लोगो को उनकी भाषा कि वेबसाइट और न्यूज़ चैनल पढ़ते/देखते हुए तो बहुत बार देखा है किन्तु किसी हिंदी-भाषी को हिंदी समाचार वेबसाइट को उत्सुकता और गर्व से पढ़ते बहुत कम ही देखा है पाया है|
आज हमारी हिंदी हीन भावना से ग्रसित होती जा रही है जबकि हमारी भाषा इतनी समृद्ध है कि इससे अभी भी काफी कुछ सीखा और किया जा सकता है |
हिंदी हमारी भाषा है और हमे इस पर गर्व है और सदैव रहेगा| आज हिंदी एक मनोरंजन करने वाली हिंदी फिल्मों और धारावाहिकों कि भाषा बन कर रह गयी है |
अपनी भाषा – हिंदी को उसका साहित्यिक और सामाजिक स्थान वापस दिलाने का एक प्रयास है |
आइये हिंदी को सुने, समझें, जाने और इसे और समृद्ध बनाने का प्रयास करें |
जय हिंदी ! जय हिंदुस्तान !